<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-5014016883713954622</id><updated>2011-08-01T15:04:08.428-07:00</updated><category term='SANJEEV SHARMA'/><category term='SANJEEV SHARMA DEHRADUN'/><title type='text'>मै पत्रकार था कोई चुविंगम नहीं</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://sachkikasam.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5014016883713954622/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sachkikasam.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>संजीव शर्मा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09911979507649737409</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='33' height='26' src='http://2.bp.blogspot.com/_2UtPjr6xhKI/Svg3fKIzLoI/AAAAAAAAAN4/8S8rx-HyhjQ/S220/5380_1125924103406_1086241834_30383212_4354384_n.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>4</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5014016883713954622.post-6831775768655378713</id><published>2010-07-27T09:27:00.000-07:00</published><updated>2010-07-28T10:29:29.007-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='SANJEEV SHARMA'/><title type='text'>खबर की कीमत और पत्रकारिता का स्‍याह पन्‍ना</title><content type='html'>&lt;h2 class="contentheading"&gt;   &lt;a class="contentpagetitle" href="http://vichar.bhadas4media.com/home-page/37-my-view/373-2010-07-28-11-16-16.html"&gt;   खबर की कीमत और पत्रकारिता का स्‍याह पन्‍ना &lt;/a&gt;  &lt;/h2&gt;&lt;div class="article-toolswrap"&gt; &lt;div class="article-tools clearfix"&gt;  &lt;div class="article-meta"&gt;&amp;nbsp;&lt;span class="createdate"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class="createby"&gt;&lt;a href="http://vichar.bhadas4media.com/home-page/37-my-view/373-2010-07-28-11-16-16.html"&gt;http://vichar.bhadas4media.com/home-page/37-my-view/373-2010-07-28-11-16-16.html&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;img align="left" alt="तांत्रिक" border="0" src="http://vichar.bhadas4media.com/images/stories/tantrik%2011.jpg" title="तांत्रिक" /&gt;: &lt;strong&gt;एक पत्रकार का दर्द&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;:&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;इसके लिये वो महिला को नग्न करता था : बदमाश मुझ पर भूखे भेडि़यों की तरह टूट पड़े : इस बार मुझसे इस्तीफा ले लिया गया&lt;/strong&gt;  : मीडिया जब भी अपना मुंह खोलता है या अपनी कलम से बोलता है तो अपने लिए  नहीं बल्कि इस गूंगे-बहरे समाज के लिए. एक मीडियाकर्मी के लिए ख़बर की चाहत  जुनून के किस हद तक होती है, इस सवाल का जवाब पत्रकार बंधु अच्छी तरह  जानते हैं. समाज का दर्द हम देख नहीं सकते और अपने दर्द में कभी उफ तक करना  हमें मंजूर नहीं होता. कुछ दर्द ऐसा भी होता है जो बदलते समय के साथ और  गहरा होता जाता है. और कई बार यही दर्द जेहन से निकल कर कागज के पन्‍नों पर  उतर आता है. और फिर पन्‍ना कभी कभी बहुत सीख दे जाता है. मैंने भी इन  पन्‍नों से बहुत कुछ सीखा है. इन्‍हीं यादों का झरोखा आज मैं खोलने को  मजबूर हुआ हूं.&lt;br /&gt;ये बात कुछ साल पहले की है. मैं उस समय एक टीवी न्यूज़ एजेंसी में काम कर  रहा था. मेरे लिये ये सौभाग्य की बात थी पूरे जिले में मै अकेला टीवी  पत्रकार था, पर परेशान कर देने वाली बात ये थी, काफी हाथ-पांव मारने के बाद  भी मेरे हाथ महीने में महज पांच-छह ख़बरे ही लग पाती थी। खबरों के लिए कई  बार तो सैकडों किलोमीटर का सफर भी तय करना पडता था. लेकिन न कभी रास्ते  छोटे हुए और ना ही मेरी हिम्मत कम हुई. ख़बर खोजने की चाहत में मैं हमेशा  अपने कान और आंख खुली रखता, एक बार अचानक मेरे हाथ एक ऐसा कागज लगा जिसमे  लिखा था हर समस्या का समाधान है हमारे पास, साथ ही ये भी कि वो तांत्रिक  निःसंतान को मनचाहा बच्चा भी दे सकता है.&lt;br /&gt;मैंने ये सारी जानकारी अपने न्यूज़ डेस्क तक पहुंचाई मुझे कहा गया ख़बर  बना कर भेजो.मैंने तुरंत जाल बिछाया क्योंकि ये ख़बर मेरे लिये चुनौती भरी  थी, एक जोड़े को मैने उस तांत्रिक के पास भेजा. उन लोगों ने संतान ना होने  की बात तांत्रिक को बताई. तांत्रिक ने कहा बिल्‍कुल बच्चा हो जायेगा, बस  रोज मेरे पास आना होग, क्‍योंकि थोड़ा इलाज करना पड़ेगा. एक बार मैं खुद भी  उस तांत्रिक बाबा के पास पहुंचा क्योंकि मैं मामले का जायजा खुद लेना चाहता  था. इस बार भी उसने वही बात कही. तांत्रिक के पास मेरे अलावा और कई  महिलाएं भी आई हुई थी, जिनके साथ बाबा पर्दे के अन्दर क्या कुछ करता था, ये  कहना यहां पर मेरे लिये आसान नहीं है.&lt;br /&gt;दरअसल ये बाबा सभी महिलाओं को बोलता था उनके अन्दर कोई आत्मा घुस गयी  है, जिसे वो निकाल सकता है. इसके लिये वो महिला को नग्न करता था, आगे क्या  होता होगा ये समझने के लिये दिमाग पर ज्यादा जोर डालने की जरूरत नहीं है.  मैंने ये बात भी अपने न्यूज़ डेस्क को बता दी अब बारी अपने मिशन को अंजाम तक  पहुंचाने की थी. इस बार मै एक लड़की के साथ उस तांत्रिक के पास पहुंचा ही  था कि वहां पहले से मौजूद कुछ बदमाश मुझ पर भूखे भेडि़यों की तरह टूट पड़े.  दस लोगों के बीच में मैं अकेला था. जहां जहां उनका दिल किया वहां वहां वो  अपनी ताकत की अजमाइश किए. मैं भी अपने सामर्थ्‍य के हिसाब से मुकाबला करता  रहा.&lt;br /&gt;किसी तरह बचकर मैंने वहां से डीएसपी को फोन किया, क्योंकि आगे उन सब का  मुकाबला कर पाना संभव नहीं था, फिर एक पत्रकार होने के नाते इस तरह मारपीट  करना मेरी नज़रों में न कल सही था और ना ही आज है. इस दौरान अपने बचाव में  मैं जो कुछ मुझ से हो सका वो सब किया.जख्मी हालत में मैं तुरंत थाने पहुंचा  मुझ पर हमला करने वाले भी भाग चुके थे. अभी थाने के अन्दर बैठे मुझे चंद  मिनट भी नहीं हुये थे कि अचानक मोबाइल की घंटी बज उठी. ये कॉल मेरे एजेंसी  के न्यूज़ डेस्क, नोयडा से थी. बात करने वाले वो अधिकारी थे जो कभी हमें  ख़बरों के लिए जूझना सिखाते थे. महोदय ने मुझसे यह नहीं पूछा कि हालत कैसी  है, क्या हुआ तुम्हारे साथ, बल्कि&amp;nbsp; सीधा फरमान सुनाओ दिया गया कि चुपचाप  नोएडा पहुंचो.&lt;br /&gt;पुलिस मुझे जख्मी हालत में अस्पताल ले गयी. वहां मेरा मेडिकल कराया गया.  तभी वहां के डॉक्टर को पता चला कि मै पत्रकार हूं तो उन्‍होंने धीरे से  कहा भाई साहब एक टीवी पत्रकार है संजीव शर्मा, उनकी ख़बरें बड़ी अच्छी होती  हैं, मैं उन्‍हें जानता तो नहीं परंतु वो आपकी मदद कर सकते हैं. ये सुनने  के बाद मैं रोने लगा. मैंने डॉक्‍टर को बताया कि मैं ही संजीव शर्मा हूं.  फर्क सिर्फ इतना है कि खबर बनाने वाला आज खुद खबर बन गया है. डॉक्टर साहब  ने कहा आप मेरे बेटे जैसे हो इसलिए एक सलाह देता हूँ, इस समाज की बुराइयों  से लड़ना बड़ा कठिन है. ये सब आगे भी होता रहेगा लेकिन कभी हार मत मानना. एक  बार पेज थ्री फिल्म जरूर देखना, आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा. मैंने  डॉक्टर को धन्‍यवाद कहा और बाहर निकला. डॉक्‍टर साहब की सीख आज भी मेरे  अंदर जिंदा है और जिंदा रहेगी. एक पल मुझे लगा शहर की मीडिया और  मीडियाकर्मी मेरा साथ देंगे. लेकिन यहां मैं गलत था, कोई मेरे साथ खड़ा नहीं  हुआ. जिनसे मुझे सबसे ज्यादा उम्मीद थी उन्‍होंने ही सबसे पहले मेरा साथ  इस मुश्किल घड़ी में छोड़ दिया. लेकिन मैंने हार नहीं मानी तांत्रिक और  तांत्रिक के गुंड़ों के खिलाफ थाने में मामला दर्ज करवा दिया. हां, लेकिन  एक पत्रकार होने की हैसियत से नहीं बल्कि एक आम नागरिक की हैसियत से.&lt;br /&gt;अगले रोज मैं नोएडा रवाना हो गया. न्यूज़ एजेंसी ने मेरे इस बहादुरी के  लिए पुरस्‍कार पहले से ही तैयार रखा हुआ था. मुझसे कहा गया आप कुछ समय के  लिये रिपोर्टिंग नहीं करेंगे. मुझे ये समझ में नहीं आया आखिर कंपनी ने ये  फैसला क्‍यों लिया है. फिर पता चला कि मुझ पर आरोप लगाया गया है कि मैंने  तांत्रिक से दस हजार रूपये मांगे थे. मैंने न्‍यूज एजेंसी ज्‍वाइन करने के  बाद प्रॉपटी खरीदी. इन आरोपो का जवाब मैंने कम्पनी को नहीं दिया. कारण साफ  है जब उनके नज़रों में हम बेईमान हैं तो इमानदारी का सबूत देने की जरूरत  क्या है. हां, मैंने पांच बिस्वा जमीन खरीदी, लेकिन ये पैसे मेरे उस पिता  के थे, जो आर्मी में लम्बे समय से गुमशुदा है. ये पैसा मेरी माता जी को  आसाम राईफल्स ने दिया था. और ये जमीन सिर्फ एक लाख चालीस हजार रूपये की  थी,&amp;nbsp; न की करोड़ों की. क्या बीस साल की नौकरी में मेरे पिता ने इतने पैसे  भी नहीं कमाये होंगे कि वो अपने बच्चो के लिए पांच बिस्‍वा जमीन खरीद सकें.&lt;br /&gt;मैंने अपने बेगुनाही का जवाब नहीं दिया, लेकिन असलियत सामने आने के बाद  खुद तांत्रिक ने पुलिस में लिखित बयान दिया कि गलती मेरी है. मुझे माफ कर  दिया जाये, मैं शहर छोड कर चला जाउंगा. मेरा मकसद ही था उस तांत्रिक को शहर  से बाहर करना ताकि अंधविश्‍वास में अंधी होकर फिर कोई महिला उस हैवान के  हवस की शिकार न बनें. ये अलग बात है कि इस कामयाबी के बदले मेरी नौकरी और  इज्जत दोनों दांव पर लग गयी. मेरी इमानदारी के दस्तावेज थाने में आज भी  मौजूद है.&lt;br /&gt;इधर, नोयडा से बहादुरी का खिताब लेकर मैं अपने घर वापस पहुंच चुका था.  फिर कम्पनी से फोन आया, मुझसे एक बार फिर नोयडा में हाजिरी दर्ज करवाने के  लिये कहा गया. इस बार मुझसे इस्तीफा ले लिया गया और कहा गया आपके खिलाफ  काफी शिकायतें हैं. मेरे खिलाफ शहर के ही एक नेता ने कम्पलेंट की थी, जिसके  साइबर कैफे में बीएफ चलती थी. उसके खिलाफ हुई जांच की सीआईडी की टीम में  मैं भी शामिल था. वर्तमान में ये मामला न्यायालय में विचाराधीन है. कम्पनी  ने मुझे नौकरी से निकाल दिया. मैं कई महीने बेरोजगार रहा. लेकिन हर काली  रात के बाद जिस तरह नई सुबह होती है, उसी तरह मेरी जिंन्दगी में उजाला आया.  मुझे दिल्ली के एक उभरते एनसीआर न्यूज चैनल में नौकरी मिल गयी. इस चैनल  में भी मेरे खिलाफ काफी कंम्पलेंट गयी लेकिन मुझे चैनल की तरफ से कभी कुछ  नहीं बोला गया, क्योंकि उन्हें मुझ पर और मेरे इमान पर भरोसा था.&lt;br /&gt;मेरा उस न्यूज़ एजेंसी से आज सिर्फ चंद सवाल हैं-&lt;br /&gt;1. क्या एक मिशन में फेल होने का मतलब नौकरी से हाथ धौना होता है ? &lt;br /&gt;2. स्कूल में जाने वाला बच्चा भी फेल हो जाता है, इसका मतलब क्या वो गद्दार है ?&lt;br /&gt;3. इंडिया क्रिकेट टीम भी हमेशा नहीं जीतती, इस हार को मैच फिक्सिंग कहा जाए ? &lt;br /&gt;4. किसी की चंद झूठी लाइनें क्या हमारे कैरियर को खत्म कर सकती हैं?&lt;br /&gt;5. दो साल का रिश्ता चैबीस घंटे में कैसे टूट सकता है ?&lt;br /&gt;6. विश्वास नहीं था तो अपना पत्रकार क्यो बना दिया ?&lt;br /&gt;7. क्या हम पत्रकार आप के लिए चवीइंगम हैं, चूसों और थूक डालो ?&lt;br /&gt;एक रिपोर्टर से न्यूज़ रूम के डेस्क इंचार्ज और रिपोर्टर से एसआईटी हेड  का रास्ता आसान नहीं होता. मैंने ये रास्ता तय किया और अपने आपको साबित भी  किया. लेकिन अपने दस साल के छोटे से अनुभव में बहुत कुछ सीखा, जहां विश्वास  है वहां सबकुछ है, जहां विश्वास नहीं वहां कुछ नही. अगर मैं तांत्रिक वाले  मिशन में कामयाब नहीं हुआ तो इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ये था कि मैंने ये  जानकारी उस इंसान के साथ शेयर की जिन्‍हें बहुत कुछ मानता था. लेकिन वो  मेरी बात को रोटी की तरह पचा नहीं सके और उन्होंने ये जानकारी तांत्रिक को  दे दी. खैर हर मोड़ हर दिन हर लम्हां हमें कुछ सीखाता है और हमे सीखना भी  चाहिए इसी का नाम है जिन्दगी लाइव.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;script src="http://www.gmodules.com/ig/ifr?url=http://digital-tutors.googlecode.com/svn/trunk/counter.xml&amp;amp;synd=open&amp;amp;w=245&amp;amp;h=280&amp;amp;title=Preset+Digital+BCD+Counter&amp;amp;border=%23ffffff%7C3px%2C1px+solid+%23999999&amp;amp;output=js"&gt;&lt;/script&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5014016883713954622-6831775768655378713?l=sachkikasam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sachkikasam.blogspot.com/feeds/6831775768655378713/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sachkikasam.blogspot.com/2010/07/blog-post_27.html#comment-form' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5014016883713954622/posts/default/6831775768655378713'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5014016883713954622/posts/default/6831775768655378713'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sachkikasam.blogspot.com/2010/07/blog-post_27.html' title='खबर की कीमत और पत्रकारिता का स्‍याह पन्‍ना'/><author><name>संजीव शर्मा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09911979507649737409</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='33' height='26' src='http://2.bp.blogspot.com/_2UtPjr6xhKI/Svg3fKIzLoI/AAAAAAAAAN4/8S8rx-HyhjQ/S220/5380_1125924103406_1086241834_30383212_4354384_n.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5014016883713954622.post-1036615256588616600</id><published>2010-05-03T08:38:00.000-07:00</published><updated>2010-07-15T12:54:57.058-07:00</updated><title type='text'>आपकी राय</title><content type='html'>मीडिया जब भी अपना मुह खोलता है या अपनी कलम से बोलता है तो सिर्फ दुनिया के लिए ,खुद वो भले ही तकलीफ हो लेकिन अपने मुह से वो उफ़ तक नहीं बोलता कई बार यह दर्द जहन से बहार आ जाता है और कभी कभी तो कलम मैं भी उतर आता है ... और फिर न जाने बहुत कुछ लिख जाता है ,, मैं अपने दर्द को बयाँ किया इस दर्द को मीडिया के कुछ साथियो ने अपने ब्लॉग , वेबसाइट मैं खास जगह दी पेश है मीडिया की एक वेबसाइट पर मेरा लेख और मंथन करने वाले पत्रकारों के कमेंट्स और सुझाव &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मीडिया मंच &lt;br /&gt;मीडिया से जुड़े हर प्रोफेशनल की वेब साईट www.mediamanch.com&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Thursday, February 26, 2009&lt;br /&gt;उस पत्रकार की वेदना को पढ़ मेरी आँखे नम हो गई &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक मीडिया वेबसाइट पर एक पत्रकार संजीव शर्मा की आपबीती पढ़ी...सच में संजीव के दर्द को पढ़ कर मेरी आँखे नम हो गयी .संजीव ने लिखा है की एक स्टिंग ओपरेशन को अंजाम देने का ,उन्हें जिंदगी भर मलाल रहेगा ।सच ही तो है, एक पत्रकार जब किसी को इन्साफ नहीं दिला पता है ,तो वो अपने आप को जिंदगी भर कोसता रहता है ॥मेरी नज़र में यदि संजीव जी जिस मकसद से स्टिंग ओपरेशन करने गए थे, यदि उसी रूप में उन्हें स्टोरी मिल जाती तो, वो एक साधारण सी स्टोरी या स्टिंग ओपरेशन बन कर रह जाती ।लेकिन जिस सच से संजीव जी का सामना हुआ ,वो सच तो दिल को हिला देनेवाला है ॥एक महिला जो प्रसव पीडा से गुजर रही हो और उसके बाद भी अपना शरीर बेचने के लिए तैयार हो...सुन कर कलेजा कॉप जाता है॥आखिर वो महिला अपने प्रति इतनी निर्मम कैसे हो सकती है ।क्या उसे जिंदगी में इतने जख्म मिले है की, उसे अब किसी चीज़ की परवाह नहीं .जब पूरी कहानी पढ़ी तो लगा की दोषी कौन है ,वे लोग जिन्होंने उस लाचार महिला का फायदा उठाया या फिर हम पत्रकार जो उसे इन्साफ नहीं दिला सके ।मै यहाँ संजीव शर्मा द्वारा मीडिया के वेबसाइट भड़ास ४ मीडिया पर लिखे गए उनकी लाचारी को भड़ास ४ मीडिया का क्रेडिट देते हुए कॉपी पेस्ट कर रहा हु, ताकि आप भी इस सच को पढ़ सके । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पेश है संजीव शर्मा की आपबीती .सौजन्य - भड़ास ४ मीडिया .कॉम &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैं उस समय एक न्यूज चैनल में काम करता था। मेरी सबसे ज्यादा दिलचस्पी खोजी पत्रकारिता में थी। मुझे जानकारी मिली थी कि हिमाचल प्रदेश के एक जिला में सिर्फ 10 रुपए में जिस्म बिक रहा है। सुन के विश्वास होना आसान नहीं था लेकिन न जाने क्यों मैं इस सनसनीखेज खबर को अपने कैमरे में कैद करने के लिए बेचैन हो गया। मैंने सबसे पहले अपने चैनल को इसकी सूचना दी। मुझे पहले मना कर दिया गया क्योंकि स्टिंग ऑपरेशन चैनल दिखाना ही नहीं चाहता था।&lt;br /&gt;मैंने अपने समाचार प्रमुख से भी बात की लेकिन उन्होंने भी रोक दिया। काफी मनाने के बाद मुझे स्टिंग करने के लिए कह दिया गया। मैं खुश था क्योंकि यह मौका अपने आपको साबित करने का था। मैं कैमरा पर्सन को लेकर उस इलाके में पहुंच गया। वो एरिया काफी खतरनाक था। हमारी एक गलती जान पर भारी पड़ सकती थी लेकिन न जाने क्यों कदम पीछे खीचने को मन नहीं कर रहा था। 100 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके मैं वहां पहुंच गया था जहां मेरी मंजिल थी। हम वहां एक सरकारी अतिथि गृह में रुके। हमने अपने मिशन के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। अतिथि गृह के चौकीदार से मैंने पूछा कि क्या हमें एक रात के लिए कोई लड़की यहां मिल सकती है। चौकीदार ने उपर-नीचे घूरा और कहा कि मुझे आप लोग मीडिया वाले लगते हैं। कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं होगी। चौकीदार को हमने यकीन दिला दिया कि हम मीडिया वाले नहीं है। चौकीदार ने बताया कि यहां एक महिला है जिसके साथ आप 10 रुपये में ही सेक्स कर सकते हैं। लेकिन उसके लिए पहले आपको मेरी जेब गर्म करनी होगी। मैंने तुरंत उसकी जेब में 100 रुपए दे दिए। दो-तीन दिन हम होटल में ही रुके रहे। एक दिन सुबह-सुबह चौकीदार हमारे कमरे में आया और कहा कि वो महिला बाहर खड़ी है, जिसकी आपको जरूरत है। मैंने कहा हमे पहले दूर से दिखाओ। मैंने दूर से जब उस महिला को देखा तो आंखें चकरा गई। उसकी उम्र करीब 30 साल थी और गजब की सुंदर थी। वह महिला गर्भवती दिख रही थी। गर्भ भी आखिरी स्टेज में था, मतलब 8 या 9 महीने का गर्भ रहा होगा। मैंने चौकीदार से कहा कि वह मुझे उस महिला के घर लेकर चलते। चौकीदार ने पहले तो मना किया लेकिन बाद में वे हम लोगों को उसके घर पहुंचाने के लिए राजी हो गया। होटल से 20 किलोमीटर दूर उसका घर था। हम बड़ी मुश्किल से वहां पहुंचे। महिला के घर में घुसे तो देखा कि वह दर्द से बेहाल हो रही थी। उसे हम लोगों को अपने घर में देखकर झटका-सा लगा। उसने चोकीदार से कहा कि वो कभी भी बच्चे को जन्म दे सकती है। वो हम लोगों को यहां बाद में लाता। मुझे वहां कि भाषा समझ में आती थी। मैंने उस महिला से कहा कि हमें सेक्स नहीं करना है। बस आप हमसे कुछ पल के लिए बात कर लो। वो महिला मान गई। मैंने कहा कि आप क्यों अपने जिस्म को बेचती हैं। उस महिला का जवाब बड़ा कड़वा था। उसने कहा कि जनाब, यहां सब जिस्म को रौंदने वाले आते हैं। पहली बार किसे ने वो सवाल पूछा है जिसका जवाब मेरे पास भी नहीं हैं। उस महिला ने कहा कि आप यहां अपनी हवस की भूख मिटाने आए हो, जो करना है अन्दर चलो और करो। मैंने पूछा कि क्या कीमत लोगी। उसने कहा- सिर्फ 10 रुपए। मैंने कहा- मुझसे आधा घंटा बात कर लोग, 500 रुपए दूंगा। वह बोली- मैं भिखारी नहीं हूं। मैंने कहा कि जो तुम कराती हो वो तो भिखारी से भी गन्दा काम है। उसने कहा कि मैं आपके हर सवाल का जवाब दूंगी लेकिन पैसे नहीं लूंगी। पता नहीं क्यों, मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसे बता दिया कि हम लोग यहां एक मिशन पर आए हैं और टारगेट सिर्फ आप हो। मैं आपकी जिंदगी के बारे सब कुछ जानना चाहता हूं।&lt;br /&gt;मैंने कैमरा पर्सन को कहा कि कैमरा आन रखे। उस महिला ने अपनी राम कहानी शुरू की, बोली- मेरी जब शादी हुई तब से 10 साल तक मेरा शारीरिक संबंध सिर्फ अपने पति से रहा। हम पहले भी गरीब थे आज भी गरीब हैं। गांव के ही एक स्कूल में स्वीपर की भरती होनी थी। मैंने सोचा कि क्यों न मैं यहां भरती हो जाऊं। मैं गांव के प्रधान के पास गई। मैंने कहा कि प्रधानजी, मुझे स्कूल में स्वीपर की नौकरी पर लगवा दीजिए। मुझे प्रधान से कुछ कागज भी लेने थे। प्रधान ने मुझे कहा कि सारा काम हो जाएगा, बस मेरी प्यास बुझा दो। प्रधान की मुझ पर पहले से ही गन्दी नजर थी। मैंने मना किया पर प्रधान जबरदस्ती करने पर उतारू हो गया। उसे बहुत रोका लेकिन उस दरिन्दे ने मेरी एक न सुनी। इसके बाद मुझे नौकरी के लिए पंचायत सेक्रेटरी के पास जाना था क्योंकि प्रमाणपत्र पर उनका साइन होना था। प्रधान ने उसे सब कुछ बता दिया था। उसने भी वही मांग की जो प्रधान ने की थी। कई शिकारी मुझ पर हमला बोल चुके थे लेकिन नौकरी मिलना अभी तक सपना था। वो समय भी आया जब इंटरव्यू था। इंटरव्यू लेने एसडीएम आईं थीं। साथ में उनका सहायक भी था। उसे भी प्रधान ने सब कुछ बता दिया था। एक बार सोचा कि शायद नौकरी लग जाए तो सब कुछ भूल जाउंगी लेकिन यहां भी मुझसे एसडीएम के सहायक ने कई रात उसी होटल में सेक्स किया। फिर भी मुझे नौकरी नही मिली। एक नौकरी के लिए मैंने सब कुछ लुटा दिया लेकिन नौकरी तो नहीं मिली। हां, जिस्म की मंडी में नौकरी जरूर मिल गई। अब हर रोज बिकती हूं, सिर्फ 10 रुपए में।&lt;br /&gt;इतना सब कहकर वो महिला रोने लगी। इस महिला की एक 17 साल की बेटी भी है जो अपनी मां की ही तरह सुंदर है। वह 11वीं में पढ़ रही है। बेटा दूर कहीं हास्टल में रहकर पढ़ता है। बेटी गांव में सबसे शरीफ मानी जाती है लेकिन गांव वालो ने उस लड़की का भी जीना हराम कर दिया है। महिला ने कहा कि आज गांव की महिलाएं हमसे बात नहीं करती लेकिन रात के वक्त कई मर्द मेरे मेरे साथ मुंह काला करने के लिए आ जाते हैं।&lt;br /&gt;महिला की बातें सुनकर मैं परेशान हो गया। मन ही मन ठान लिया कि इस महिला को अपने चैनल के माध्यम से इंसाफ दिलाउंगा। मैंने अपने न्यूज चैनल को स्टिंग आपरेशन का सारा वीडियो भेज दिया। यह खबर जब प्रसारित हुई तो कई दिनों तक सुर्खियों में रही। चैनल ने न सिर्फ टीआरपी बटोरा बल्कि पैसा भी खूब कमाया। पर उस महिला के हिस्से आया सिर्फ बदनामी। मेरा यह कैसा मिशन था! जिस देश में एक महिला प्रधानमंत्री की कुर्सी को लात मार देती है, जिस देश में राष्टपति पद पर एक महिला विराजमान हो, उसी देश में एक महिला सिर्फ 10 रुपये के लिए जिस्म बेचने को मजबूर है। न्यूज चैनल पर खबर चलने के बाद उस महिला का दर्द सभी तक पहुंचा होगा। सत्ता तक, एनजीओ तक, संगठनों तक। लेकिन महिला को सिवाय बदनामी हाथ आने के, कुछ नहीं मिला। मुझे अफसोस है कि मैंने उस महिला का स्टिंग आपरेशन कर अपने चैनल को क्यों भेजा जब चैनल में इतना दम नहीं था कि वो महिला को न्याय दिला सके। मुझे अब महसूस होता है कि मीडिया किसी मिशन पर नहीं है। उसे सिर्फ ऐसी खबरें चाहिए जिससे उसे टीआरपी मिले और पैसा मिले। आखिर कब मिशन की पगडंडी पर फिर चलेगा मीडिया का पहिया?&lt;br /&gt;लेखक संजीव शर्मा पत्रकार हैं। mediasanjeev@gmail.com &lt;br /&gt;Posted by latikesh at 2:46 AM  &lt;br /&gt;5 comments: &lt;br /&gt;अनिल कान्त : said... &lt;br /&gt;मेरी भी आँखें नाम हो गयी .... जब न्यूज़ चैनल इन्साफ नहीं दिला सकते तो आम आदमी की क्या बिसात ....बहुत ही दर्द भरी दास्तान &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;February 26, 2009 3:26 AM  &lt;br /&gt;रंजना said... &lt;br /&gt;nihshabd hun...... &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;February 26, 2009 3:34 AM  &lt;br /&gt;अंशुमाली said... &lt;br /&gt;वाकई दिल दहलाती है खबर। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;February 26, 2009 3:44 AM  &lt;br /&gt;sanjeev said... &lt;br /&gt;sharma ji meri wajah se aap k aankho main ashak aaye main es k liye shama chahoonga....&lt;br /&gt;mujhe dukh es baat ka jab maine apne dukh ko byan kiya to saara media mere 7 roya or khushi ki ki saare media ki soch ab bhi ek hain kaash KHABRON KA KAROOBAR KARNE WALE BHI ese samajh sakte...&lt;br /&gt;main aapko nahin jaanta lekin aapki wajah se duniya mujhe jaane lagiu hain aapka blog pada so raha nahin...&lt;br /&gt;aapka &lt;br /&gt;sanjeev sharma &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;February 27, 2009 11:02 PM  &lt;br /&gt;latikesh said... &lt;br /&gt;संजीव जी &lt;br /&gt;जब मैंने एक मीडिया वेबसाइट पर आप के दर्द को पढ़ा , तो मै अपने पोस्ट पर इसे प्रकाशित कर ज्यादा लोगो तक पहुचाने की कोशिश की है .,मुझे ख़ुशी ,है ,करीब ५० से भी ज्यादा लोगो ने आप के अनुभव को पढ़ा और ..उस पर अपने दुःख का इज़हार भी किया है ..संजीव जी , मै आप की सराहना करता हु की मीडिया मे जॉब के प्रेशर के वावजूद आप ने अपने अनुभव को बड़े ही बेबाकी से लिखा है ..आप के साहस की मै दाद देता हु. &lt;br /&gt;आप सदा सुखी रहे , यही ईश्वर से कामना करता हु. &lt;br /&gt;latikesh &lt;br /&gt;मुंबई &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;March 1, 2009 1:02 AM  &lt;br /&gt;Post a Comment &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भड़ास ४ मीडिया मीडिया वेबसाइट मैं जब मेरा दर्द पब्लिश हुआ तो कई साथियो ने मेल करके अपनी बात कुछ इस कदर रखी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;bhadas ka lekh   Inbox&lt;br /&gt;Reply    &lt;br /&gt;Reply to all&lt;br /&gt;Forward&lt;br /&gt;Print&lt;br /&gt;Add sajid to Contacts list&lt;br /&gt;Delete this message&lt;br /&gt;Report phishing&lt;br /&gt;Show original&lt;br /&gt;Message text garbled? &lt;br /&gt;sajid khan  to me &lt;br /&gt;show details  2/25/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;hi sanjeev bhai.ap ka lekh pda bhadas par ,aacha lga aap ne aapne dil ki bhadas bhahar nikal di,kitne loog hoote hia jo yeh kaam kar paate hia,aap aaj kal kha hia?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;sajid khan  to me &lt;br /&gt;show details  2/25/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;yaar tum is taarif ke kabil hu,tum ne jo likha hia sach likha hia,media main reh kar bhi hum media waale logo k eliye kuch bhi nhia kar paa rahen,can i get ur no?&lt;br /&gt;- Show quoted text -&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शर्मा जी ........   Inbox&lt;br /&gt;Reply    &lt;br /&gt;Reply to all&lt;br /&gt;Forward&lt;br /&gt;Print&lt;br /&gt;Add Vikram to Contacts list&lt;br /&gt;Delete this message&lt;br /&gt;Report phishing&lt;br /&gt;Show original&lt;br /&gt;Message text garbled? &lt;br /&gt;Vikram Dutt  to me &lt;br /&gt;show details  2/25/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दोस्त आपकी बाते मन को भा गई और मै लिखने बैठ गया ! आपने ठीक लिखा की आपकी रूह कांप जाती है जब मीडिया का सालीअसली चेहरा सामने आ जाता है ! मेरा नाम विक्रम दत्त है और मै पैदा इलेक्ट्रोनिक मीडिया में ही हुआ ! अफ़सोस कई ऐसी खबरे की जो दिल को दुखा जाती है ! असल में भाई साहब सुनील दत्त के साथ मिलकर कई बेहतरीन खबरे की लेकिन आज पीछे मुड़कर देखते है तो तकलीफ होती है ! जोधपुर का सट्टा बाज़ार हमारा स्ट्रिंग था ! जहां हवा की रफ्तार पर सट्टा लगता है और भी कई बाते है जो हमने दिखाई ! 14 माह का बच्चा जो शराबी बन गया ! ............................................ लिखने बैठे तो लिखते ही जाये बस !!! लेकिन आखिर में न्यूज चैनल की सच्चाई ये ही है, अफसोस परिवार पालने की जिम्मेवारी ने यहाँ जीने को मजबूर कर दिया !!!!!!!!!!!!&lt;br /&gt;खैर आपकी मुलाकात अच्छी लगी, फिर बाते होंगी इसी उम्मीद के साथ ................................ &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;badhi   Inbox&lt;br /&gt;Reply    &lt;br /&gt;Reply to all&lt;br /&gt;Forward&lt;br /&gt;Print&lt;br /&gt;Add dinesh to Contacts list&lt;br /&gt;Delete this message&lt;br /&gt;Report phishing&lt;br /&gt;Show original&lt;br /&gt;Message text garbled? &lt;br /&gt;dinesh sahara  to me, dinesh.sahara &lt;br /&gt;show details  2/25/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;sanjeev ji .aap ki report bahut dardnak hone ke babjud media ka sach cahera ujagar karti hai jisme matlab ki yari samaj me aati hai dinesh shakya sahara samay 155.pacca talab etawah 9412182182 &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;this was an heart touching story   Inbox&lt;br /&gt;Reply    &lt;br /&gt;Reply to all&lt;br /&gt;Forward&lt;br /&gt;Print&lt;br /&gt;Add Atul to Contacts list&lt;br /&gt;Delete this message&lt;br /&gt;Report phishing&lt;br /&gt;Show original&lt;br /&gt;Message text garbled? &lt;br /&gt;Atul Chaturvedi  to me &lt;br /&gt;show details  2/25/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Images are not displayed. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Display images below - Always display images from atulchaturvedi29@gmail.com  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझे उस स्टिंग का जिंदगी भर अफसोस रहेगा      &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;this was an heart touching story, infact it feels very bad that our industries, just uses us for their benefit. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;-- &lt;br /&gt;ATUL CHATURVEDI&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ATUL CHATURVEDI&lt;br /&gt;REPORTER&lt;br /&gt;TIMES GROUP&lt;br /&gt;"BANGALORE MIRROR"&lt;br /&gt;09741196901, 09480465900, 09342003428&lt;br /&gt;http://atulchaturvedi29.blogspot.com/&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;realy we should thing   Inbox&lt;br /&gt;Reply    &lt;br /&gt;Reply to all&lt;br /&gt;Forward&lt;br /&gt;Print&lt;br /&gt;Add javed to Contacts list&lt;br /&gt;Delete this message&lt;br /&gt;Report phishing&lt;br /&gt;Show original&lt;br /&gt;Message text garbled? &lt;br /&gt;javed zakaria &lt;akolamedia@rediffmail.com&gt;  to me &lt;br /&gt;show details  2/28/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Images are not displayed. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Display images below - Always display images from akolamedia@rediffmail.com  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Dear friend &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;I have read your story on Latikesh Sharma blog its touch to heart that we are only being use by all &lt;br /&gt;I have also done a string operation in Akola in Akola there was a gang working for bogus handicap certificate i goan to them and meet them as a businessmen and said that i have to travel always so pl make my duplicate handicap certificate after two days he call me and ask for 5 thousand i gave him 1000/- and remaining after work he have done my work and he call me on mobile i said that i want to go to Mumbai pl take my ticketon that cirtificate for third AC he said ok after he call and said your ticket is ready come on train and collect the ticket and your pass and pay the amount when i reach on station my camera person was also on station and police officer were also on station when he cam to give me the ticket and document of medical certificate and Samaj Kalyan certificate of handicap i gave money to him and that time my camera was also on and them police arrested him after the went to that persons room i thing that now our duty has finished police got 70 thousand in that room and 26 government rubber stamps police have shown 7 thousand in there report after that they started to ask him that whom u have given the certificate and police have goan to all those person and collected a huge money of bribe now that police have also transfer and case is in court police have taken money and all duplicate handicap are traveling with concession in railway nothing more no official railway enquire was done at that time i thing we have done our job for police or for our country&lt;br /&gt;Thanks&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Javed Zakaria&lt;br /&gt;Akola (news24)&lt;br /&gt;9422860786&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;pratikriya   Inbox&lt;br /&gt;Reply    &lt;br /&gt;Reply to all&lt;br /&gt;Forward&lt;br /&gt;Print&lt;br /&gt;Add Vivek to Contacts list&lt;br /&gt;Delete this message&lt;br /&gt;Report phishing&lt;br /&gt;Show original&lt;br /&gt;Message text garbled? &lt;br /&gt;Vivek Anand  to me &lt;br /&gt;show details  3/1/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;sanjeev ji kya aapko pata nahi ki hamari media ka karobaar kya hai?mai yah to nahi janati ki wo kaun sa channel tha par dost yaha har shakh par ullu baithe hai...kuchh apwad hai jo ND TV ke naam se jaane jate hai par dost yaha sab aisa hi hai.                                             vivek anand (freelancae cameraman in star news) &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;vichar   Inbox&lt;br /&gt;Reply    &lt;br /&gt;Reply to all&lt;br /&gt;Forward&lt;br /&gt;Print&lt;br /&gt;Add Arun to Contacts list&lt;br /&gt;Delete this message&lt;br /&gt;Report phishing&lt;br /&gt;Show original&lt;br /&gt;Message text garbled? &lt;br /&gt;Arun Harsh  to me &lt;br /&gt;show details  3/2/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;vaaki aaj channel sirf or sirf TRP or PAISSA ke liye kaam krte hai smaj me jo drd hai usse unhe koi lena dena nhi un logo ki aatma mr chuki hai lekin aap jaise logo ke kaarn abhi bhi kuch visvaas baaki hai ki kbhi vkt aane pr kuch aahuti to jrur denge aap &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;hi   Inbox&lt;br /&gt;Reply    &lt;br /&gt;Reply to all&lt;br /&gt;Forward&lt;br /&gt;Print&lt;br /&gt;Add ASHISH to Contacts list&lt;br /&gt;Delete this message&lt;br /&gt;Report phishing&lt;br /&gt;Show original&lt;br /&gt;Message text garbled? &lt;br /&gt;ASHISH AGARWAL &lt;ashishmili@gmail.com&gt;  to me &lt;br /&gt;show details  3/7/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Mr. Sanjiv&lt;br /&gt;Hi&lt;br /&gt;This is Ashish Agarwal. I was in Cobrapost. I did many sting sories &lt;br /&gt;but i agree with u it a shameful job on journalism&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Now &lt;br /&gt;I  run a NGO  NAME FRIENDS   &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Re: pratikriya   Inbox&lt;br /&gt;Reply    &lt;br /&gt;Reply to all&lt;br /&gt;Forward&lt;br /&gt;Print&lt;br /&gt;Add Vivek to Contacts list&lt;br /&gt;Delete this message&lt;br /&gt;Report phishing&lt;br /&gt;Show original&lt;br /&gt;Message text garbled? &lt;br /&gt;Vivek Anand  to me &lt;br /&gt;show details  3/9/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;dear frnd,&lt;br /&gt;sanjeev kya mai jaan sakta hu k aap kisnews channel mai hai.waise aap na batana chahe to koi baat nahi par u hi puchh baitha .do"t mind.dost waise mai freelancer cameraman hoo aur bhadas 4 media lagatar padata rahta hoon.aap sooch rahe honge k mujhe kya padi hai par dost mai b media k andaruni sach se jab {2002 mai} ru-ba-ru hua to badi taklif hui.....khair aapka jawab to usi din aa gaya tha par dost toda busy tha            vivek anand &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;--------------------------------------------------------------------------------&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Thankyou Re: Chat with shweta sharma   Inbox&lt;br /&gt;Reply    &lt;br /&gt;Reply to all&lt;br /&gt;Forward&lt;br /&gt;Print&lt;br /&gt;Add shweta to Contacts list&lt;br /&gt;Delete this message&lt;br /&gt;Report phishing&lt;br /&gt;Show original&lt;br /&gt;Message text garbled? &lt;br /&gt;shweta sharma  to me &lt;br /&gt;show details  5/4/09  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Thanks for sending me mail. Sorry i m not online right now but as soon&lt;br /&gt;possible i will get back to you.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Media Club of India - Global Media Network&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Print, Social, Digital Media, Journalist, Translators, Jobs, Careers - India&lt;br /&gt;HomeMy PageMembersPhotosVideosForumEventsGroupsBlogsJobs PostingMusicChat&lt;br /&gt;All Blog PostsMy BlogAdd a Blog Post पत्रकारिता के लिए अपने परिवार को भी दाव पर लगा दिया&lt;br /&gt;Posted by संजीव शर्मा on December 5, 2009 at 2:30am &lt;br /&gt;View संजीव शर्मा's blog &lt;br /&gt;मुझे आज भी वो दिन अच्छी तरह याद है , मैं एक न्यूज़ एजेन्सी मैं काम करता था , मेरी प्यास ,भूख , नींद सब खबर ही थी , पुलिस वालो से मेरी शुरू से ही नहीं बनती थी , हाँ इंटेलिजेंस ब्यूरो के कुछ लोगो से दोस्ती थी , मुझे उनसे खबर मिली थी कि हिमाचल मैं कुछ महिला दलाल हिमाचली बालाओं को खरीदने आ रही है , यह खबर इंटेलिजेंस ब्यूरो को उनके उस खबरी ने दे थी , जो खुद उन महिलाओं के लिए कुछ दिन तक काम करता आ रहा था , उन महिलाओं ने उसे कुछ पैसे भी दिए थे मकसद था , हिमाचल प्रदेश कि उन कम उम्र कि लड़कियों को हुस्न के बाज़ार मैं उतारना जिन्होंने कभी सेक्स नहीं किया हो , वो महिला दलाल मुँह मांगे पैसे देने के लिए तेयार थी , मुझे आशिक अली नाम के इन्फोर्मेर ने साफ़ कहा - सर मैंने खुद उन महिलाओं से पैसे लिए है लेकिन अब मेरा ज़मीर जाग चूका है क्यूँ कि मैं खुद किसी का भाई हूँ और पिता भी - हो सकता है कि कल वो महिलाएं मेरी बेटी को भी इस पेशे मैं उतारे इस लिए सर मैं उन्हें सलाखों के अन्दर पहुँचाना चाहता हूँ ,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझे उस इन्फोर्मेर कि बात मैं दम नज़र आने लगा था यह सच हैं , मैंने अपने न्यूज़ डेस्क को इन्फोर्म कर दिया था, पहले न्यूज़ प्रोड्यूसर टाल मटोल करने लगे लेकिन मैं भी नहीं माना यहाँ तक कि मेरी बहस तक हुई मुझे कुछ नज़र नहीं आ रहा था , मैं किसी भी हालत मैं उन महिला दलालों को बेनकाब करना चाहता था , लेकिन आसान यह काम भी नहीं था , हार के मुझे न्यूज़ शूट के लिए इजाज़त मिल ही गयी मैंने सबसे पहले उन दलालों के फ़ोन नंबर का पता लगाया , एक दिन आशिक अली ने मेरी बात उन दलालों से यह कहकर करवाई कि मैं हिमाचल का सबसे बड़ा दलाल हूँ , पहले उन महिलाओं ने मुझ से ठीक तरिके से बात नहीं कि , लेकिन कुछ दिनों के बाद उनका फ़ोन आया और उन्होंने कहा कितना माल हैं तुम्हारे पास मुझे यह समझते हुआ देर नहीं लगी कि माल का मतलब क्या है ? मैंने कहा हर तरह का माल मौजूद है बस बोली लगाओ यहाँ आकर , उन्होंने कहा कि हम जल्द आएंगे यहाँ मेरी परेशानी बड़ते जा रही थी क्यूँकि अब लड़किया कहाँ से लाता और फिर वो हुआ जो मैं चाहता भी था , और नहीं भी ...........&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझे एक दिन फिर दलालों का देहरादून से फ़ोन आया मुझ से कहा गया कि माल तैयार रखना घटिया माल नहीं चलेगा फ्रेश कि जरुरत है ,,,, ये बोल सुनकर मेरे खून में आग लग गयी , मन खुद को भी कोसता था कि क्या ? मैं इन महिलाओं को बेनकाब कर पाउँगा ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक दिन फिर फ़ोन आया इस बार दलाल मेरे शहर से सिर्फ चंद किलो मीटर कि दुरी पर थे ,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बार फिर वही बोल मुझे कहा गया एक दिन के अन्दर एक दर्ज़न लड़की कि जरुरत है , मेरे पास कोई भी विकल्प नहीं था , उधर दूसरी तरफ न्यूज़ एजेन्सी का डंडा उन्हें किसी भी कीमत पर खबर कि जरुरत थी फिर चैनल के लिए स्ट्रिंगर कि औकात क्या होती है यह मेरे स्ट्रिंगर भाई भी सही तरिके से जानते है खबर ने भेजने का मतलब था कि रिपोर्टर ने पैसे निगल लिए है , वैसे मेरे लिए यह खबर स्वाभिमान कि लडाई भी थी क्यूंकि कि मैं साबित करना चाहता था कि किस तरह एक स्ट्रिंगर अपने सर पर मौत का कफ़न बांधकर जंग में उतरता है यह जानने के बावजूद भी की कब उसे दूध मैं मक्खी कि तरह निकाल कर फेंका जायेगा , मेरे सामने एक ही विकल्प था उन नाबालिग़ मासूम लड़किओं को बचा सकूँ जो हुस्न कि मंडी मैं नीलाम होने को तैयार बेठे थी , मैंने उन दलालों के आने से पहले फैक्ट्री मैं काम करने वाली कई महिलाओं से बात कि और कहा क्या वो मेरा साथ देगी लेकिन किसी ने भी मुझे भरोसा नहीं दिलाया मुझे हैरानी इस बात कि थी जिन महिलाओं से मैं मदद मांगना चाहता था वो कह रही थी कि आप हमारे साथ कुछ भी करें हमे मंज़ूर है लेकिन हम पुलिस के पचडे में नहीं पड़ना चाहते ,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इधर दूसरी तरफ महिला दलाल भी आने वाली थी सवाल यह था में उनके सामने किन लडकियों को पेश करता क्यूंकि समाज सूधारने का बीडा तो यहाँ पर मैंने ही उठाया था , लेकिन किसी ने मेरे मदद नहीं कि सही तो यह भी में यहाँ मदद मांग जरुर रहा था लेकिन मदद का मोहताज़ बिल्कुल नहीं था, में अच्छी तरह जानता हूँ कि खुदा भी उसकी मदद करता है जो खुद कि मदद करता है थक हार कर में अपने घर पहुंचा में काफी परेशान था दूसरी तरफ डेस्क से फ़ोन पर फ़ोन मुझ से जब मेरे घरवालो ने परेशानी का कारण पूछा तो आँखों से अश्क झलक आए में घर में फ़ुट फ़ुट कर रोया क्यूँ कि में कुछ नहीं कर पा रहा था , वहीँ अपनी समस्या अपने डेस्क को नहीं बता सकता था क्यूँ कि उन्हें समस्या नहीं बल्कि समाधान चाहिए था ,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरी बहन कि उम्र उस समय १६ साल थी उसने मुझे कहा भईया में उन महिला दलालों को बेनकाब करवाउंगी एक बात को उसने बड़े जोर से कहा कि भईया मेरे नाटक करने से अगर वो दलाल आपके जाल में फंस जाते है तो कम से कम बाकी नाबालिग़ लडकियों कि जान तो बच जायेगी , कम से हम किसी को हुस्न कि मंडी में जाने से तो वो बच जायेगी मुझे अपनी बहन कि बात पहले बुरी लगी लेकिन उसकी बात में उन लड़कियों के लिया दर्द भी छिपा था जिन्हें हुस्न कि मंडी के दरिन्दे फांस कर ले जाते है और बेच देते है , मेरी बहन मुझ से छोटी है लेकिन उसकी बात मेरी सोच से भी ऊँची थी , मैंने उसकी बात मान ली एक बार फिर मुझे दलालों का फ़ोन आया और बोला कि हमे लेने एक चौक पर आ जाओ मैंने अपनी गाडी उठाई और निकल पड़ा मिशन पर दो नेपाल मूल की महिला दलाल बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी , हम तीन लोग उन महिलाओं के पास गए मेरे दो और दोस्त थे वो लोग भी फर्जी दलाल बने थे हम बड़े प्यार से उन महिलाओं को अपने घर ले गए वहाँ पर मैंने पहले से ही स्पाई केम लगा हुआ था मैंने अपनी बहन से उन दोनों दलालों को मिला भी दिया मेरे सामने उन दलालों ने मेरे बहन से वो सवाल पूछे जो में बयाँ नहीं कर सकता में अन्दर ही अन्दर रो रहा था हार कर मैं में उन महिला दलालों के बीच से उठ गया क्यूँ के में वो सवाल बर्दाश्त नहीं कर सकता था वो पूछ रही थी मेरे बहन से ..... मेरे सिस्टर ने ऐसा जाल बिछाया कि वो दलाल फंस चुकी थी उन्होंने एक एक कर के अपने राज़ खोले और कहा बड़े बड़े बिल्डर्स और बड़े बड़े बाबू और कई बार तो नेता भी हम से लड़की कि डिमांड करते है हिमाचल के लड़किओं कि ज्यादा डिमांड है लेकिन हमे १५ साल से १८ साल तक कि जरुरत है जिनके दाम सही मिल जाते है हमारे पास एडवांस बुकिंग रहती है है हम हर महिला को १००० रूपए हर दिन देते है और जिनके साथ भी वो एक रात जाएगी उसका ६०० रूपए हर आदमी से अलग से मिलेंगे यहाँ यह भी कहा गया कि अभी भी एक दर्ज़न से ज्यादा लड़किया हमारे पेशे में जुडी है यह सारी बातें हमारे कैमरे में रिकॉर्ड हो रही थी चार घंटे के इस शूट में हुस्न के मंडी के कई सनसनी खेज राज खुल चुके थे , हम तीनो फर्जी दलालों में से एक मेरा दोस्त पुलिस को सारी बात बताने चला गया ताकि उन महिलाओं कि गिरफ्तारी हो सकती ,,, इधर दलाल हमारे जाल में फंस चुकी थी और अब दलालों ने एडवांस पेमेंट दे दी थी और वो मेरी सिस्टर को लेकर अपने साथ हिमाचल से देहरादून ले कर जा रहे थे लेकिन तभी मेरे घर से सिर्फ एक किलोमीटर दूरी पर पुलिस ने आरोपी दलाल महिलाओं को हिरासत में ले लिया क्यूँ की रिपोर्टर होने के साथ मेरी यह फ़र्ज़ भी था हम चाहते तो सिर्फ खबर दिखाते लेकिन हमने उन दलाल महिलाओं को जेल पहुंचा दिया इस तरह हमने सच को सामने रखा मुझे कभी कभी लगता है अपनी बहन को इस्तेमाल नहीं करना था लेकिन यह सच है आज तक कई नाबालिग़ अगर हमारा मिशन पूरा नहीं होता तो दर्ज़नों लडकियां आज भी जिस्म के बाज़ार में लूट रही होती आज मेरे बहन की शादी हो चुकी है और एक बच्ची कि माँ भी है यह खुलासा हिमाचल पत्रकारिता के इतिहास का पहला स्टिंग ऑपरेशन था अगले दिन हर न्यूज़ पेपर की खबर मैं पहले पन्ने पर हम थे शायद ही किसी रिपोर्टर ने कभी अपने पेशे के लिए अपने परिवार को दाव पर लगाया हो हमने भी सिर्फ इस लिए अपने कदम पीछे नहीं किया क्यूँ की मेरा पेशा ही मेरा जूनून था .......... मैंने कई खुलासे किये लेकिन एक चैनल के लिए स्टिंगर USE AND THROUGH से ज्यादा कुछ नहीं मैं आज उस चैनल मैं नहीं हूँ ..... मुझे भी मक्खी की तरह दूध से निकल कर फेंक दिया गया ...... सिर्फ इस लिए क्यूँ की मैं एक मिशन मैं फ़ैल हो गया ...... लेकिन आज मैं ताल ठोक कर कह सकता हूँ .... मैं असल जिंदगी में पास हूँ और रहूँगा क्यूंकि बेईमानी ...चाटुकारिता ...चापलूसी ....मेरी खून मैं नहीं हैं और जिस दिन आएगी उस दिन मीडिया को अलविदा कहूँगा ....आज मैं एक अच्छे चैनल मैं हूँ और पोस्ट मैं भी खुद से ज्यादा मुझे आपने टीम पर भरोसा है ..... बस उस खुदा ये ही दुआ है ..... ऊंचाई तक पहुँचाना जरूर लेकिन ज़मीन से दूर भी ना करना जो कुछ मेरे साथ मेरे चैनल ने उस दौरान किया मैं कभी अपने स्टिंगर के साथ न ऐसा न कर सकूँ .... &lt;br /&gt;Tags: अपने, के, को, दाव, दिया, पत्रकारिता, पर, परिवार, भी, लगा &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Share  Twitter Facebook &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Next Post &gt;&lt;br /&gt;Comment&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;You need to be a member of Media Club of India - Global Media Network to add comments!&lt;br /&gt;Join Media Club of India - Global Media Network&lt;br /&gt;Comment by amar dev paswan on December 26, 2009 at 6:58pm &lt;br /&gt;sanjiv ji ham ye kamna karte hai aapke is junun ke liye ki ram kary or or raastiy kary me aapka yu hi bhade aapka chaaw sath hi aap se jada aapki bahan ko sat sat koti naman karta hu ki wo aajki jhansi hai or aap kafi bhagysali hai ki bhagwan ne aapko aysi bahan di aapka --- amardev - News24 kolkata  Comment by tee kay marwah on December 25, 2009 at 11:45am &lt;br /&gt;आपकी हिम्मत काबिले तारीफ हे इसी तरह आगे बड़ते रहिए हिम्मते मरदे मददे खुदा रही चेन्नल से निकले जाने की तो वो नहीं निकलता तो अच्छी जगह कैसेमिलती  Comment by ombeer singh on December 7, 2009 at 7:47pm &lt;br /&gt;KALAM KE VEER AAPKO SALAM.  Comment by abhas kumar on December 7, 2009 at 7:07pm &lt;br /&gt;dost, apki himmat ko salam.  Comment by Anil Mittal on December 6, 2009 at 8:22pm &lt;br /&gt;संजीव जी नमस्कार ,,,,आपका पहला स्टिंग वाह जी वाह क्या कहना आपका ,,,,,,,,,,,आपने तो कमाल कर दिया ,,,,,,,,,,,,,आपसे ऐसी उम्मीद शायाद किसी को भे नहीं होगी ,,,,,,,मगर आपने कर दिया ,,अपने परिवार को भी दाव पर लगा दिया ,,,,,,,,आपके जज्बे को सलाम ,,,,,आपकी हिम्मत को सलाम ,,,,,,,,,  Comment by krishna deo on December 6, 2009 at 3:53pm &lt;br /&gt;आपके जज़्बे को सलाम दोस्त !  Comment by Rajendra Joshi on December 6, 2009 at 9:16am &lt;br /&gt;Bahut khuub , Imandari aur dusron ki madad bahut santusti deti hai , Joo dusroon ko nahin mil sakti , Jo aatam saaman aapko mila hoga uski koi keemat nahin , Isliye Imandari ka rasta hi aage badhne ka rasta hai ,  Comment by Amit Kr. Singh Virat on December 5, 2009 at 8:36pm &lt;br /&gt;thousands times salute ur daring work  Comment by Amit Kr. Singh Virat on December 5, 2009 at 8:34pm &lt;br /&gt;aap jaise log jab tak patrakarita mein raheinge tab tak hi log is peshe par bharosa kareinge warna.........aaj to patrakarita gaali lagti hai  Comment by pankaj pachpol on December 5, 2009 at 4:26pm &lt;br /&gt;bhaie aapko salute bahot bahot salut aapanke bahot hi aachha kam kiya hai lekin mera ek saval hai her reportor ke sath me chahe o news chaanel me ho ya printt media me uski saunthha usase aissa bartav kyu karti hai&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;i really proud on u   Inbox&lt;br /&gt;    Reply    &lt;br /&gt; Reply to all&lt;br /&gt; Forward&lt;br /&gt; Print&lt;br /&gt; Add vivek to Contacts list&lt;br /&gt; Delete this message&lt;br /&gt; Report phishing&lt;br /&gt; Show original&lt;br /&gt; Message text garbled? &lt;br /&gt; vivek dubey &lt;vivek.dubey@newz36.com&gt;  to me &lt;br /&gt; show details  Jun 25  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Respected Sir,&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;                    i read ur autobiography in media munch,  Excellent Work, i really proud on  u. media really need people like u&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt;Thanks &amp; Regards &lt;br /&gt;Vivek Dubey &lt;br /&gt;Transmission Officer &lt;br /&gt;Zee 24 Ghante Chhattisgarh raipur&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;script src="http://www.gmodules.com/ig/ifr?url=http://digital-tutors.googlecode.com/svn/trunk/counter.xml&amp;amp;synd=open&amp;amp;w=245&amp;amp;h=280&amp;amp;title=Preset+Digital+BCD+Counter&amp;amp;border=%23ffffff%7C3px%2C1px+solid+%23999999&amp;amp;output=js"&gt;&lt;/script&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5014016883713954622-1036615256588616600?l=sachkikasam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sachkikasam.blogspot.com/feeds/1036615256588616600/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sachkikasam.blogspot.com/2010/05/blog-post_03.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5014016883713954622/posts/default/1036615256588616600'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5014016883713954622/posts/default/1036615256588616600'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sachkikasam.blogspot.com/2010/05/blog-post_03.html' title='आपकी राय'/><author><name>संजीव शर्मा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09911979507649737409</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='33' height='26' 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समाचार प्रमुख से भी बात की लेकिन उन्होंने भी रोक दिया। काफी मनाने के बाद मुझे स्टिंग करने के लिए कह दिया गया। मैं खुश था क्योंकि यह मौका अपने आपको साबित करने का था। मैं कैमरा पर्सन को लेकर उस इलाके में पहुंच गया। वो एरिया काफी खतरनाक था। हमारी एक गलती जान पर भारी पड़ सकती थी लेकिन न जाने क्यों कदम पीछे खीचने को मन नहीं कर रहा था। 100 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके मैं वहां पहुंच गया था जहां मेरी मंजिल थी। हम वहां एक सरकारी अतिथि गृह में रुके। हमने अपने मिशन के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। अतिथि गृह के चौकीदार से मैंने पूछा कि क्या हमें एक रात के लिए कोई लड़की यहां मिल सकती है। चौकीदार ने उपर-नीचे घूरा और कहा कि मुझे आप लोग मीडिया वाले लगते हैं। कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं होगी। चौकीदार को हमने यकीन दिला दिया कि हम मीडिया वाले नहीं है। चौकीदार ने बताया कि यहां एक महिला है जिसके साथ आप 10 रुपये में ही सेक्स कर सकते हैं। लेकिन उसके लिए पहले आपको मेरी जेब गर्म करनी होगी। मैंने तुरंत उसकी जेब में 100 रुपए दे दिए। दो-तीन दिन हम होटल में ही रुके रहे। एक दिन सुबह-सुबह चौकीदार हमारे कमरे में आया और कहा कि वो महिला बाहर खड़ी है, जिसकी आपको जरूरत है। मैंने कहा हमे पहले दूर से दिखाओ। मैंने दूर से जब उस महिला को देखा तो आंखें चकरा गई। उसकी उम्र करीब 30 साल थी और गजब की सुंदर थी। वह महिला गर्भवती दिख रही थी। गर्भ भी आखिरी स्टेज में था, मतलब 8 या 9 महीने का गर्भ रहा होगा। मैंने चौकीदार से कहा कि वह मुझे उस महिला के घर लेकर चलते। चौकीदार ने पहले तो मना किया लेकिन बाद में वे हम लोगों को उसके घर पहुंचाने के लिए राजी हो गया। होटल से 20 किलोमीटर दूर उसका घर था। हम बड़ी मुश्किल से वहां पहुंचे। महिला के घर में घुसे तो देखा कि वह दर्द से बेहाल हो रही थी। उसे हम लोगों को अपने घर में देखकर झटका-सा लगा। उसने चोकीदार से कहा कि वो कभी भी बच्चे को जन्म दे सकती है। वो हम लोगों को यहां बाद में लाता। मुझे वहां कि भाषा समझ में आती थी। मैंने उस महिला से कहा कि हमें सेक्स नहीं करना है। बस आप हमसे कुछ पल के लिए बात कर लो। वो महिला मान गई। मैंने कहा कि आप क्यों अपने जिस्म को बेचती हैं। उस महिला का जवाब बड़ा कड़वा था। उसने कहा कि जनाब, यहां सब जिस्म को रौंदने वाले आते हैं। पहली बार किसे ने वो सवाल पूछा है जिसका जवाब मेरे पास भी नहीं हैं। उस महिला ने कहा कि आप यहां अपनी हवस की भूख मिटाने आए हो, जो करना है अन्दर चलो और करो। मैंने पूछा कि क्या कीमत लोगी। उसने कहा- सिर्फ 10 रुपए। मैंने कहा- मुझसे आधा घंटा बात कर लोग, 500 रुपए दूंगा। वह बोली- मैं भिखारी नहीं हूं। मैंने कहा कि जो तुम कराती हो वो तो भिखारी से भी गन्दा काम है। उसने कहा कि मैं आपके हर सवाल का जवाब दूंगी लेकिन पैसे नहीं लूंगी। पता नहीं क्यों, मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसे बता दिया कि हम लोग यहां एक मिशन पर आए हैं और टारगेट सिर्फ आप हो। मैं आपकी जिंदगी के बारे सब कुछ जानना चाहता हूं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैंने कैमरा पर्सन को कहा कि कैमरा आन रखे। उस महिला ने अपनी राम कहानी शुरू की, बोली- मेरी जब शादी हुई तब से 10 साल तक मेरा शारीरिक संबंध सिर्फ अपने पति से रहा। हम पहले भी गरीब थे आज भी गरीब हैं। गांव के ही एक स्कूल में स्वीपर की भरती होनी थी। मैंने सोचा कि क्यों न मैं यहां भरती हो जाऊं। मैं गांव के प्रधान के पास गई। मैंने कहा कि प्रधानजी, मुझे स्कूल में स्वीपर की नौकरी पर लगवा दीजिए। मुझे प्रधान से कुछ कागज भी लेने थे। प्रधान ने मुझे कहा कि सारा काम हो जाएगा, बस मेरी प्यास बुझा दो। प्रधान की मुझ पर पहले से ही गन्दी नजर थी। मैंने मना किया पर प्रधान जबरदस्ती करने पर उतारू हो गया। उसे बहुत रोका लेकिन उस दरिन्दे ने मेरी एक न सुनी। इसके बाद मुझे नौकरी के लिए पंचायत सेक्रेटरी के पास जाना था क्योंकि प्रमाणपत्र पर उनका साइन होना था। प्रधान ने उसे सब कुछ बता दिया था। उसने भी वही मांग की जो प्रधान ने की थी। कई शिकारी मुझ पर हमला बोल चुके थे लेकिन नौकरी मिलना अभी तक सपना था। वो समय भी आया जब इंटरव्यू था। इंटरव्यू लेने एसडीएम आईं थीं। साथ में उनका सहायक भी था। उसे भी प्रधान ने सब कुछ बता दिया था। एक बार सोचा कि शायद नौकरी लग जाए तो सब कुछ भूल जाउंगी लेकिन यहां भी मुझसे एसडीएम के सहायक ने कई रात उसी होटल में सेक्स किया। फिर भी मुझे नौकरी नही मिली। एक नौकरी के लिए मैंने सब कुछ लुटा दिया लेकिन नौकरी तो नहीं मिली। हां, जिस्म की मंडी में नौकरी जरूर मिल गई। अब हर रोज बिकती हूं, सिर्फ 10 रुपए में।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इतना सब कहकर वो महिला रोने लगी। इस महिला की एक 17 साल की बेटी भी है जो अपनी मां की ही तरह सुंदर है। वह 11वीं में पढ़ रही है। बेटा दूर कहीं हास्टल में रहकर पढ़ता है। बेटी गांव में सबसे शरीफ मानी जाती है लेकिन गांव वालो ने उस लड़की का भी जीना हराम कर दिया है। महिला ने कहा कि आज गांव की महिलाएं हमसे बात नहीं करती लेकिन रात के वक्त कई मर्द मेरे मेरे साथ मुंह काला करने के लिए आ जाते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महिला की बातें सुनकर मैं परेशान हो गया। मन ही मन ठान लिया कि इस महिला को अपने चैनल के माध्यम से इंसाफ दिलाउंगा। मैंने अपने न्यूज चैनल को स्टिंग आपरेशन का सारा वीडियो भेज दिया। यह खबर जब प्रसारित हुई तो कई दिनों तक सुर्खियों में रही। चैनल ने न सिर्फ टीआरपी बटोरा बल्कि पैसा भी खूब कमाया। पर उस महिला के हिस्से आया सिर्फ बदनामी। मेरा यह कैसा मिशन था! जिस देश में एक महिला प्रधानमंत्री की कुर्सी को लात मार देती है, जिस देश में राष्टपति पद पर एक महिला विराजमान हो, उसी देश में एक महिला सिर्फ 10 रुपये के लिए जिस्म बेचने को मजबूर है। न्यूज चैनल पर खबर चलने के बाद उस महिला का दर्द सभी तक पहुंचा होगा। सत्ता तक, एनजीओ तक, संगठनों तक। लेकिन महिला को सिवाय बदनामी हाथ आने के, कुछ नहीं मिला। मुझे अफसोस है कि मैंने उस महिला का स्टिंग आपरेशन कर अपने चैनल को क्यों भेजा जब चैनल में इतना दम नहीं था कि वो महिला को न्याय दिला सके। मुझे अब महसूस होता है कि मीडिया किसी मिशन पर नहीं है। उसे सिर्फ ऐसी खबरें चाहिए जिससे उसे टीआरपी मिले और पैसा मिले। आखिर कब मिशन की पगडंडी पर फिर चलेगा मीडिया का पहिया?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;script src="http://www.gmodules.com/ig/ifr?url=http://digital-tutors.googlecode.com/svn/trunk/counter.xml&amp;amp;synd=open&amp;amp;w=245&amp;amp;h=280&amp;amp;title=Preset+Digital+BCD+Counter&amp;amp;border=%23ffffff%7C3px%2C1px+solid+%23999999&amp;amp;output=js"&gt;&lt;/script&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5014016883713954622-8656914511928225514?l=sachkikasam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sachkikasam.blogspot.com/feeds/8656914511928225514/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://sachkikasam.blogspot.com/2010/05/blog-post.html#comment-form' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5014016883713954622/posts/default/8656914511928225514'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5014016883713954622/posts/default/8656914511928225514'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sachkikasam.blogspot.com/2010/05/blog-post.html' title='मुझे उस स्टिंग का जिन्दगी भर अफ़सोस रहेगा'/><author><name>संजीव शर्मा</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09911979507649737409</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='33' height='26' 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मकसद था, हिमाचल प्रदेश की उन कम उम्र कि लड़कियों को हुस्न के बाज़ार मैं उतारना जिन्होंने कभी सेक्स नहीं किया हो, वो महिला दलाल मुँह मांगे पैसे देने के लिए तेयार थी। मुझे आशिक अली नाम के इन्फोर्मेर ने साफ़ कहा- सर मैंने खुद उन महिलाओं से पैसे लिए है लेकिन अब मेरा ज़मीर जाग चुका है क्योंकि मैं खुद किसी का भाई हूँ और पिता भी -हो सकता है कि कल वो महिलाएं मेरी बेटी को भी इस पेशे मैं उतारें इसलिए सर मैं उन्हें सलाखों के अन्दर पहुँचाना चाहता हूँ।&lt;br /&gt;मुझे उस इन्फोर्मेर कि बात में दम नज़र आने लगा था यह सच है। मैंने अपने न्यूज़ डेस्क को इन्फोर्म कर दिया था। पहले न्यूज़ प्रोड्यूसर टाल मटोल करने लगे लेकिन मैं भी नहीं माना। यहाँ तक कि मेरी बहस तक हुई। मुझे कुछ नज़र नहीं आ रहा था। मैं किसी भी हालत में उन महिला दलालों को बेनकाब करना चाहता था। लेकिन आसान यह काम भी नहीं था। हार कर मुझे न्यूज़ शूट के लिए इजाज़त मिल ही गयी। मैंने सबसे पहले उन दलालों के फ़ोन नंबर का पता लगाया। एक दिन आशिक अली ने मेरी बात उन दलालों से यह कहकर करवाई कि मैं हिमाचल का सबसे बड़ा दलाल हूँ। पहले उन महिलाओं ने मुझ से ठीक तरीकेसे बात नहीं की, लेकिन कुछ दिनों के बाद उनका फ़ोन आया और उन्होंने कहा कितना माल है तुम्हारे पास? मुझे यह समझते हुआ देर नहीं लगी कि माल का मतलब क्या है? मैंने कहा हर तरह का माल मौजूद है बस बोली लगाओ यहाँ आकर। उन्होंने कहा कि हम जल्द आएंगे यहाँ मेरी परेशानी बड़ते जा रही थी क्योंकि अब लड़किया कहाँ से लाता और फिर वो हुआ जो मैं चाहता भी था, और नहीं भी।&lt;br /&gt;मुझे एक दिन फिर दलालों का देहरादून से फ़ोन आया। मुझसे कहा गया कि माल तैयार रखना। घटिया माल नहीं चलेगा। फ्रेश की जरुरत है। ये सुनकर मेरे खून में आग लग गयी। मन मेंखुद को भी कोसता था कि क्या मैं इन महिलाओं को बेनकाब कर पाउँगा?&lt;br /&gt;एक दिन फिर फ़ोन आया इस बार दलाल मेरे शहर से सिर्फ चंद किलोमीटर की दूरी पर थे।इस बार फिर वही बोल, मुझे कहा गया एक दिन के अन्दर एक दर्ज़न लड़कियोंकी जरुरत है। मेरे पास कोई भी विकल्प नहीं था। दूसरी तरफ न्यूज़ एजेन्सी का डंडा। उन्हें किसी भी कीमत पर खबर की जरुरत थी। फिर चैनल के लिए स्ट्रिंगर कि औकात क्या होती है? यह मेरे स्ट्रिंगर भाई भी सही तरीके से जानते हैं। खबर न भेजने का मतलब था कि रिपोर्टर ने पैसे निगल लिए हैं। वैसे मेरे लिए यह खबर स्वाभिमान कि लडाई भी थी। मैं साबित करना चाहता था कि किस तरह एक स्ट्रिंगर अपने स‌िर पर कफ़न बांधकर जंग में उतरता है। यह जानने के बावजूद कि कब उसे दूध मैं मक्खी कि तरह निकाल कर फेंका जायेगा। मेरे सामने एक ही विकल्प था, उन नाबालिग़ मासूम लड़कियों को बचा सकूँ,जिन्हेंहुस्न की मंडी मैं नीलाम करनेकीतैयारीहोरहीथी।मैंने उन दलालों के आने से पहले फैक्ट्री मैं काम करने वाली कई महिलाओं से बात की और कहा क्या वो मेरा साथ देंगी, लेकिन किसी ने भी मुझे भरोसा नहीं दिलाया। मुझे हैरानी इस बात की थी जिन महिलाओं से मैं मदद मांगना चाहता था वो कह रही थीं कि आप हमारे साथ कुछ भी करें हमे मंज़ूर है लेकिन हम पुलिस के पचडे में नहीं पड़ना चाहते।&lt;br /&gt;दूसरी तरफ महिला दलाल भी आने वाली थी। सवाल यह था में उनके सामने किन लडकियों को पेश करता। समाज स‌ुधारने का बीडा तो यहाँ पर मैंने ही उठाया था। लेकिन किसी ने मेरे मदद नहीं की।मैंयहाँ मदद मांग जरूर रहा था लेकिन मदद का मोहताज़ बिल्कुल नहीं था। में अच्छी तरह जानता हूँ कि खुदा भी उसकी मदद करता है जो खुद की मदद करता है। थक हारकर मैं अपने घर पहुंचा। काफी परेशान था। दूसरी तरफ डेस्क से फ़ोन पर फ़ोन, मुझसे जब मेरे घरवालों ने परेशानी का कारण पूछा तो आँखों से अश्क झलक आए।मैं घर में फूट-फूट कर रोया क्योंकि मैं कुछ नहीं कर पा रहा था। अपनी समस्या डेस्क को नहीं बता सकता था क्योंकि उन्हें समस्या नहीं बल्कि समाधान चाहिए था।&lt;br /&gt;मेरी बहन की उम्र उस समय 16 साल थी। उसने मुझे कहा भइया में उन महिला दलालों को बेनकाब करवाउंगी। एक बात को उसने बड़े जोर से कहा कि भइया मेरे नाटक करने से अगर वो दलाल आपके जाल में फंस जाते है तो कम से कम बाकी नाबालिग़ लड़कियों की जान तो बच जायेगी। कम से हम किसी को हुस्न की मंडी में जाने से तो वो बच जाएंगी। मुझे अपनी बहनकी बात पहले बुरी लगी लेकिन उसकी बात में उन लड़कियों के लिया दर्द भी छिपा था, जिन्हें हुस्न की मंडी के दरिन्दे फांसकर ले जाते है और बेच देते हैं। मेरी बहन मुझसे छोटी है लेकिन उसकी बात मेरी सोच से भी ऊँची थी। मैंने उसकी बात मान ली एक बार फिर मुझे दलालों का फ़ोन आया और बोला कि हमे लेने एक चौक पर आ जाओ मैंने अपनी गाडी उठाई और निकल पड़ा मिशन पर। दो नेपाल मूल की महिला दलाल बेसब्री से इंतज़ार कर रही थीं। हम तीन लोग उन महिलाओं के पास गए मेरे दो और दोस्त थे वो लोग भी फर्जी दलाल बने थे हम बड़े प्यार से उन महिलाओं को अपने घर ले गए। वहाँ पर मैंने पहले से ही स्पाई कैम लगा रखाथा। मैंने अपनी बहन से उन दोनों दलालों को मिला भी दिया। मेरे सामने उन दलालों ने मेरे बहन से वो सवाल पूछे जो में बयाँ नहीं कर सकता।मैं अन्दर ही अन्दर रो रहा था। हारकर मैं उन महिला दलालों के बीच से उठ गया।मैं वो सवाल बर्दाश्त नहीं कर सकता था। वो पूछ रही थी मेरी बहन से ..... मेरी सिस्टर ने ऐसा जाल बिछाया कि वो दलाल फंस चुकी थी।&lt;br /&gt;उन्होंने एक-एक करके अपने राज़ खोले और कहा बड़े-बड़े बिल्डर्स और बड़े-बड़े बाबू और कई बार तो नेता भी हमसे लड़की की डिमांड करते हैं। हिमाचल की लड़कियोंकी ज्यादा डिमांड है। लेकिन हमे 15 साल से 18 साल तक की जरुरत है जिनके दाम सही मिल जाते हैं। हमारे पास एडवांस बुकिंग रहती है है। हम हर महिला को 1000रुपये हर दिन देते हैं। जिनके साथ भी वो एक रात जाएगी उसका ६०० रुपये हर आदमी से अलग से मिलेंगे। यहाँ यह भी कहा गया कि अभी भी एक दर्ज़न से ज्यादा लड़किया हमारे पेशे में जुडी हैं। यह सारी बातें हमारे कैमरे में रिकॉर्ड हो रही थीं। चार घंटे के इस शूट में हुस्न के मंडी के कई सनसनीखेज राज खुल चुके थे। हम तीनो फर्जी दलालों में से एक मेरा दोस्त पुलिस को सारी बात बताने चला गया ताकि उन महिलाओं की गिरफ्तारी हो सके। इधर दलाल हमारे जाल में फंस चुकी थी और अब दलालों ने एडवांस पेमेंट दे दी थी और वो मेरी सिस्टर को अपने साथ हिमाचल से देहरादून लेकर जा रहे थे, तभी मेरे घर से सिर्फ एक किलोमीटर दूरी पर पुलिस ने आरोपी दलाल महिलाओं को हिरासत में ले लिया। रिपोर्टर होने के साथ मेरा यह फ़र्ज़ भी था हम चाहते तो सिर्फ खबर दिखाते लेकिन हमने उन दलाल महिलाओं को जेल पहुंचा दिया।&lt;br /&gt;इस तरह हमने सच को सामने रखा। मुझे कभी कभी लगता है किअपनी बहन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिएथा। लेकिन यह सच है किअगर हमारा मिशन पूरा नहीं होता तो दर्ज़नों लडकियां आज भी जिस्म के बाज़ार में लुट रही होती। आज मेरी बहन की शादी हो चुकी है और एक बच्ची की माँ भी है। यह खुलासा हिमाचल पत्रकारिता के इतिहास का पहला स्टिंग ऑपरेशन था। अगले दिन हर न्यूज़पेपर की खबर में पहले पन्ने पर हम थे। शायद ही किसी रिपोर्टर ने कभी अपने पेशे के लिए अपने परिवार को दांव पर लगाया हो। हमने भी सिर्फ इसलिए अपना कदम पीछे नहीं किया क्योंकि मेरा पेशा ही मेरा जूनून था।&lt;br /&gt;मैंने कई खुलासे किये लेकिन एक चैनल के लिए स्टिंगर USE AND THROUGH से ज्यादा कुछ नहीं। मैं आज उस चैनल मैं नहीं हूँ। मुझे भी मक्खी की तरह दूध से निकल कर फेंक दिया गया।सिर्फ इसलिए क्योंकिमैं एक मिशन मैं फेल हो गयाथा। लेकिन आज मैं ताल ठोंक कर कह सकता हूँ कि मैं असल जिंदगी में पास हूँ और रहूँगा। बेईमानी...चाटुकारिता...चापलूसी....मेरे खून मैं नहीं हैं। जिस दिन आएगी उस दिन मीडिया को अलविदा कहदूंगा। आज मैं एक अच्छे चैनल मैं हूँ। खुद से ज्यादा मुझे आपनी टीम पर भरोसा है। बस उस खुदा ये ही दुआ है किऊंचाई तक पहुँचाना जरूर, लेकिन ज़मीन से दूर भी ना करना। जो कुछ मेरे साथ मेरे चैनल ने उस दौरान किया, मैं कभी अपने स्टिंगर के साथ न ऐसा न कर सकूँ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;script 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